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Friday, 13 May 2022

  • मुस्लिम शासकों द्वारा भारत पर शासन स्थापित कर लेने के परिणाम स्वरूप प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति का ह्रास होने लगा था। मुस्लिम शासक अपने साथ एक नवीन संस्कृति धर्म तथा आदर्श लाए थे अपने शासन को सुदृढ़ करने के लिए उन्होंने स्वयं को मुस्लिम धर्म एवं इस्लामी ज्ञान व संस्कृति का प्रचार करने के लिए समर्पित कर दिया उनके द्वारा इस दिशा में किए गए प्रयासों के परिणाम स्वरुप देश में एक नई शिक्षा व्यवस्था अर्थात इस्लामी शिक्षा  पद्धति  का विकास हुआ।

  • बिस्मिल्लाह रस्म मुस्लिम शिक्षा का प्रारंभ बिस्मिल्लाह राशन से होता था वैदिक काल के संस्कार और बौद्ध काल में संस्कार से मिलती जुलती थी बालक की आयु 4 वर्ष और 4 दिन की हो जाने पर उसे नए कपड़े पहनाकर मौलवी साहब के यहां ले जाते थे यहां पर बालक को मौलवी साहब के द्वारा उपचारित कुरान की कुछ औरतों को दोहराना पढ़ता था यदि बालों को नहीं दोहरा पाता था तब इसमें ला शब्द कहना ही पर्याप्त समझा जाता था और बालक की औपचारिक पढ़ाई शुरू हो जाती थी मौलवी साहब को कुछ नजराना देखकर बालक को  मकतब  में प्रवेश दिया जाता था।


  • शिक्षा संस्थाये: - मुस्लिम काल में शिक्षा की व्यवस्था के लिए दो प्रमुख अभिकरण मकतब और मदरसा थे  मकतबो में प्रारंभिक शिक्षा दी जाती थी ।और मदरसों में उच्च शिक्षा दी जाती थी। मौलवी साहब के द्वारा बिस्मिल्लाह की रस्म के साथ बालक को मकतब में शिक्षा के लिए प्रवेश दिया जाता था।मकतब मस्जिदों से जुड़े होते थे और मस्जिद के मौलवी साहब ही मकतब में शिक्षण का कार्य करते थे। मकतब में बालक को शब्द ज्ञान तथा धार्मिक प्रार्थना सिखाई जाती थी। मकतब की शिक्षा पूरी करके छात्र मदरसों में प्रवेश लेते थे। मदरसों में विभिन्न विषयों के विद्वान शिक्षक नियमित रूप से शिक्षण कार्य करते थे।

  • पाठ्यक्रम:- पाठ्यक्रम  में दिए जाने वाले प्रारंभिक शिक्षा के अंतर्गत छात्रों को लिखना पढ़ना, पत्र व्यवहार, साधारण गणित, अरबी, फारसी की शिक्षा देकर तथा उनमें जीविकोपार्जन की क्षमता का विकास किया जाता था  इस्लाम धर्म का ज्ञान देकर तथा कुरान को कंठस्थ का पर छात्रों को धार्मिक और नैतिक आचरण से संबंधित प्रवृत्ति का विकास किया जाता था मदरसों में प्रदान की जाने वाली उच्च शिक्षा के संपूर्ण पाठ्यक्रम को दो भागों धार्मिक तथा अलौकिक में बांटा जाता था धार्मिक शिक्षा के अंतर्गत कुरान हदीस व फिक का  गहन तथा विस्तृत अध्ययन छात्रों को कराया जाता था। लौकिक शिक्षा के अंतर्गत इतिहास, भूगोल, गणित, ज्योतिष शास्त्र ,यूनानी चिकित्सा व्याकरण, तर्कशास्त्र ,कानून तथा कृषि आदि विषयों का विस्तृत ज्ञान प्रदान किया जाता था।

  • शिक्षण पद्धति :मुस्लिम काल में शिक्षण की पद्धति मुख्त्तः मौखिक थी, रखने तथा स्मरण  पर बल दिया जाता था। व्याख्यान, प्रश्न उत्तर और वाद-विवाद विधियों का प्रयोग किया जाता था। छात्रों को स्वाध्याय विधि से ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था अध्यापक की उपस्थिति में बड़ी कक्षा के कुशल और योग्य छात्र छोटी कक्षा के छात्रों को पढ़ाने का कार्य करते थे।

  • राज दरबारों में महत्वपूर्ण विषयों पर शास्त्रार्थ भी कराया जाता था। शिक्षा अरबी-फारसी के माध्यम से दी जाती थी ,लेकिन बाद में प्रारंभिक शिक्षा उर्दू के माध्यम से प्रदान की जाने लगी।

गुरु शिष्य संबंध  

  • मुस्लिम काल में गुरु और शिष्यों के संबंध बहुत घनिष्ठ थे शिक्षकों को समाज में अत्यंत सम्मानीय स्थान दिया जाता था। शिक्षकों को वेतन बहुत कम मिलता था फिर भी उन्हें सभी स्थानों पर बहुत सम्मान मिलता था। छात्रों के आदेशों का पालन करके अनुशासित और सहनशील बन जाते थे तथा गुरु छात्रों में श्रद्धा पाकर पूजनीय बन जाता था।

अनुशासन, दंड तथा पुरस्कार 


  • मुस्लिम काल में छात्र अत्यधिक अनुशासित रहते थे। नैतिक व्यवहार एक शिष्टाचार आत्मानुशासन और विनय सिलता सभी छात्रों के लिए अनिवार्य था अनैतिक आचरण करने पर, झूठ बोलने पर दैनिक पाठ याद न करने पर और अशिष्ट आचरण करने पर छात्रों को कठोर शारीरिक दंड दिया जाता था शिक्षक छात्रों को अपनी इच्छा अनुसार दंड देते थे, कोड़े लगाने उठक बैठक कराने खड़ा करने तथा मुर्गा बनाने जैसे दंड दिए जाते थे
  • उसे अयोग्य तथा चरित्रवान छात्रों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाता था कुछ शासक सम्मानित तथा धनी नागरिक योग्य छात्रों को पुरस्कार प्रदान करते थे।


स्त्री शिक्षा

  • मुस्लिम काल में स्त्री शिक्षा उपेक्षित थी। मुस्लिम काल में महिलाओं में पर्दा प्रथा का प्रचलन होने के कारण स्त्री शिक्षा का विकास बहुत कम था ।कम आयु की लड़कियां  मतकबों में जाकर प्रारंभिक शिक्षा प्रारंभ ग्रहण कर लेती थी, लेकिन उच्च  शिक्षा घर पर ही ग्रहण करने की व्यवस्था थी। इसलिए उच्च शिक्षा केवल  सही तथा  धनी परिवारों तक ही सीमित थी।

व्यवसायिक शिक्षा 

  • मुस्लिम  काल में शासकों द्वारा हस्तकला, ललित कला और वास्तुकला जैसे व्यवसायिक शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाता था मुस्लिम काल में नक्काशी, दस्तकारी, पच्चीकारी, हाथी दांत, मलमल आदि कला कौशल से संबंधित कार्य भी उच्च कोटि के किए जाते थे। इसलिए इन कला मे दक्ष कारीगरों के साथ काम करके छात्र इन कलाओं का परीक्षण करते थे।

सैनिक शिक्षा 

  • मुस्लिम काल में शासकों को अपने शासन की रक्षा के लिए निरंतर युद्ध करने पड़ते थे ।इसलिए इस साल में सैनिक शिक्षा का भी पर्याप्त विकास हुआ ।छात्रों को निपुण योद्धाओं के द्वारा तीरंदाजी ,घुड़सवारी ,युद्ध संचालन तथा अस्त्र शस्त्रों का प्रशिक्षण दिया जाता था ।

उपाधियां 

  • मुस्लिम काल में शिक्षा समाप्ति के पश्चात छात्रों को उपाधियां प्रदान की जाती थी। तर्कशास्त्र तथा दर्शनशास्त्र की शिक्षा समाप्ति पर "फाजिल" और धर्म विशेष योग्यता प्राप्त करने पर "आलिम" की उपाधि दी जाती थी।

निशुल्क शिक्षा

  • इस काल में छात्रों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता था। शिक्षा निशुल्क  प्रदान की जाती थी।

 उर्दू भाषा का विकास

  • मुस्लिम युग में उर्दू भाषा का विकास हुआ एवं इसी भाषा को सर्वाधिक महत्व प्रदान किया गया।

अरबी तथा फारसी की शिक्षा पर बल

  • मुस्लिम काल में फारसी तथा अरबी की शिक्षा पर विशेष रूप से जोर दिया जाता था।

 साहित्य की प्रगति

  • इस युग में साहित्य के क्षेत्र में भी प्रगति हुई प्रत्येक सम्राट द्वारा विद्वानों को आश्रय प्रदान किया जाता था ।

धार्मिकता पर जोर

  •  मध्यकालीन शिक्षा में धार्मिकता पर जोर दिया जाता था।

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